समाजसेवी निःस्वार्थ मूक मनीषी बिना किसी दिखावे या प्रचार के समाज की सेवा करते हैं। दूसरों की भलाई के लिए काम करते हैं, न कि किसी स्वार्थ या लाभ के लिए। बिना शोर-शराबे के अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। अपने कार्य के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होते हैं।
दुःखी, पीड़ित और जरूरतमंद लोगों के प्रति विशेष सहानुभूति रखते हैं। समाज सेवा इस प्रकार करते हैं कि उनकी पहचान तक उजागर नहीं होती। समाज की नींव होते हैं जो चुपचाप समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।